छत्तीसगढ़
धर्मांतरण विवाद पर तनाव: शव दफनाने को लेकर आमने-सामने आए दो समाज
Shantanu Roy
6 Nov 2025 6:37 PM IST

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छग
Bhanupratappur. भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के कोड़ेकुर्सी थाना क्षेत्र में एक धर्मांतरित व्यक्ति के शव को दफनाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया है। एक ओर जहां मसीही समाज अपने मृतक सदस्य का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में ही करने की मांग पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर गांव के आदिवासी और सनातन समाज के लोग इसका सख्त विरोध कर रहे हैं। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर हालात पर नजर बनाए रखी है। जानकारी के अनुसार, ग्राम कोड़ेकुर्सी निवासी मनीष निषाद (धर्मांतरण के बाद ईसाई समुदाय से जुड़ चुके थे) की 4 नवंबर की शाम बीमारी के चलते मौत हो गई थी।
परिजन मृतक के शव को लेकर उसके गृहग्राम कोड़ेकुर्सी पहुंचे और परंपरा के अनुसार दफनाने की तैयारी शुरू की। लेकिन जैसे ही ग्रामीणों को इस बात की जानकारी मिली कि शव एक धर्मांतरित व्यक्ति का है, उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि “गांव की सीमा के भीतर किसी धर्मांतरित व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।” पुलिस को सूचना मिलते ही कोड़ेकुर्सी थाना प्रभारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। मगर ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे। स्थिति बिगड़ती देख मृतक के परिजनों ने शव को थाने में ही छोड़ दिया और वहां से चले गए। देर रात तक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी स्थिति संभालने में जुटे रहे।
मसीही समाज की थाने के बाहर प्रदर्शन, बातचीत बेनतीजा
अगले दिन सुबह बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग कोड़ेकुर्सी थाना पहुंचे और अपने मृतक साथी का अंतिम संस्कार उसी गांव में करने की मांग पर डटे रहे। थाने के बाहर सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक सैकड़ों लोग एकत्रित होकर प्रशासन से जवाब मांगते रहे। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आकाश श्रीमाल, एसडीएम भानुप्रतापपुर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और मसीही समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत की। प्रशासन ने उन्हें समझाया कि गांव में दफनाने से माहौल बिगड़ सकता है, इसलिए शव को चारामा क्षेत्र स्थित मसीही समाज के कब्रिस्तान में दफनाने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन मसीही समाज के लोग इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए। उनका कहना था कि मृतक का जन्म और जीवन कोड़ेकुर्सी गांव में ही बीता, इसलिए उसका अंतिम संस्कार भी उसी जमीन पर होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक प्रशासन उनकी मांग नहीं मानता, शव को थाने से नहीं हटाया जाएगा।
गांव में गहराया धार्मिक तनाव, पुलिस सतर्क
दूसरी ओर, आदिवासी एवं सनातन समाज के लोग भी थाने के बाहर बड़ी संख्या में जुट गए। उनका कहना है कि गांव की परंपरा और धार्मिक रीति के विरुद्ध किसी धर्मांतरित व्यक्ति का अंतिम संस्कार गांव की सीमा में नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने साफ कहा कि यह “धर्म और संस्कृति का प्रश्न” है और प्रशासन किसी दबाव में ऐसा निर्णय न ले। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने पूरे कोड़ेकुर्सी गांव और थाने परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम और रिजर्व बल को भी अलर्ट पर रखा गया है। थाने परिसर में मसीही समाज और आदिवासी समाज दोनों आमने-सामने हैं, हालांकि अब तक कोई हिंसक झड़प की खबर नहीं है। प्रशासन लगातार दोनों पक्षों से संवाद बनाकर शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
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